हाल में चीन के मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी ने सर्वे और मैपिंग डेटा को ठीक से हैंडल न हो पाने से नेशनल सिक्योरिटी के बढ़ते खतरों के बारे में चेतावनी दी है। उनके अनुसार सरकारी विभागों और कंपनियों में ज्योग्राफिक जानकारी की मांग बढ़ रही है। मिनिस्ट्री के अनुसार कुछ यूनिट्स और लोगों ने क्लासिफाइड ड्रॉइंग और फाइलों को इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर पर स्टोर कर लिया है या फिर उन्हें क्लाउड सर्विस और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए शेयर किया है, जिससे लीक होने का खतरा बढ़ गया है। कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें कर्मचारियों ने गोपनीय डेटा को पर्सनल डिवाइस पर कॉपी किया और फिर अवैध रूप से सर्वे का काम आउटसोर्स किया। यही नहीं ज़रूरी अप्रूवल प्रोसेस पूरे किए बिना संवेदनशील इलाकों का बिना इजाज़त ड्रोन सर्वे किया।
मिनिस्ट्री अपने नागरिकों को चेतावनी देते हुए कह रही है कि विदेशी दुश्मन ताकतें लंबे समय से चीन की ज्योग्राफिक जानकारी को निशाना बना रही हैं, अक्सर एकेडमिक एक्सचेंज, कमर्शियल सहयोग और टूरिज्म एक्टिविटीज़ का इस्तेमाल, संवेदनशील डेटा इकट्ठा करने और उसे विदेश भेजने के लिए, बाहरी कवर के रूप में काम करता हैं। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नेशनल सिक्योरिटी को प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखने के लिए पूरे सर्वे और मैपिंग प्रोसेस के दौरान सख्त गोपनीयता उपायों को लागू किया जाना चाहिए, जिसमें सही क्लासिफिकेशन, कंट्रोल्ड एक्सेस और संवेदनशील जानकारी की मज़बूत सुरक्षा शामिल हो।
गोपनीयता को लेकर सख्त कानून के बावजूद चीन की चिंता
चीन में सर्वेइंग और मैपिंग कानून 1992 में लागू किया गया था और क्रमशः 2002 और 2017 में इसमें संशोधन किया गया। नवीनतम संशोधन 1 जुलाई, 2017 को लागू हुआ, जिसमें कुल 68 अनुच्छेद हैं। इस सर्वे और मैपिंग कानून के मुताबिक, सभी सर्वे/मैपिंग एक्टिविटीज़ देश की देख-रेख में ही की जानी चाहिए, और जिसके लिए विदेशी कंपनियों को सरकार से मंज़ूरी और चीनी पार्टनर्स के साथ सहयोग की ज़रूरत होगी। इंटरनेट मैप सर्विस प्रोवाइडर उन मैप्स का ही इस्तेमाल करेंगे जिन्हें कानूनी जांच के बाद मंज़ूरी मिली है।
इस कानून के अनुसार, ज्योग्राफिक जानकारी के प्रोडक्शन और इस्तेमाल के लिए ज़िम्मेदार लोग, साथ ही इंटरनेट मैपिंग सर्विस प्रोवाइडर, जब पर्सनल जानकारी इकट्ठा करते हैं या इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें पर्सनल जानकारी की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और नियमों का पालन करना चाहिए। कानून बनाने वालों ने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए सर्वे और मैपिंग गतिविधियों में मिलिट्री-सिविलियन इंटीग्रेशन को तेज़ करने की बात कही। नियम तोड़ने वालों पर 1 मिलियन युआन (145,000 अमेरिकी डॉलर से ज्यादा) तक का जुर्माना लग सकता है या उनके बिज़नेस लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं, और उन पर आपराधिक आरोप भी लग सकते हैं। विदेशी अपराधियों को देश से निकाला जा सकता है। जो लोग सरकार द्वारा प्रशासित क्षेत्र के बारे में बिना अनुमति के भूवैज्ञानिक डेटा जारी करते हैं, उन पर 500,000 युआन तक का जुर्माना लगेगा, जबकि मौजूदा सीमा 100,000 युआन है।
यदि मानचित्र परिणामों को राज्य रहस्यों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, तो उनके संचालन, वितरण और अवर्गीकरण को राज्य गोपनीयता कानूनों का पालन करना होगा। ऐसा डेटा विदेशी पार्टियों को देने के लिए स्टेट काउंसिल और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन जैसे ऊंचे अधिकारियों से जॉइंट मंज़ूरी की ज़रूरत होती है। मिनिस्ट्री के वीचैट अकाउंट पर प्रकाशित एक आर्टिकल के अनुसार, सरकारी एजेंसियों, सीक्रेट एंटिटीज़ और संबंधित एंटरप्राइज़ेज़ के बीच बेसिक सर्वेइंग और मैपिंग जानकारी की डिमांड लगातार बढ़ रही है। बेसिक सर्वेइंग और मैपिंग डेटा आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन गया है। इस बीच, विदेशी चीन विरोधी ताकतें चीन के सर्वेइंग और मैपिंग सेक्टर पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, और क्लासिफाइड बेसिक सर्वेइंग नतीजों को इकट्ठा करने और चुराने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। जबकि बिना इजाज़त के सर्वे करना, खासकर विदेशी संगठनों या व्यक्तियों द्वारा, गैर-कानूनी है और इस पर सज़ा का भी विधान है, जिसमें जुर्माना और डेटा ज़ब्त करना भी शामिल है।
एमएमएस का मानना है कि चीन को निशाना बनाने वाली विदेशी दुश्मन ताकतें घुसपैठ और जासूसी के लिए लगातार सर्वे और मैपिंग की भौगोलिक जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। वे अक्सर चीन के अहम सेक्टरों और महत्वपूर्ण ठिकानों में गैर-कानूनी सर्वे एक्टिविटीज़ करने के लिए एकेडमिक एक्सचेंज, बिज़नेस सहयोग और कल्चरल या टूरिज्म यात्राओं का इस्तेमाल कर चीन से सम्बन्धित महत्वपूण जानकारियां ले रही है। वे संवेदनशील जगहों, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी रिसोर्स डिस्ट्रीब्यूशन, बड़े एनर्जी फैसिलिटीज़ और नेचुरल इकोसिस्टम के बारे में भौगोलिक जानकारी हासिल करने की कोशिश करती हैं, जिससे कई क्षेत्रों की सुरक्षा में खतरे पैदा करते हैं।
ज्योग्राफिक जानकारी को लेकर सतर्क रहता आया है चीन
चीन अपनी भौगोलिक जानकारी की सुरक्षा को लेकर हमेशा से ही बेहद सतर्क रहा है। वह भौगोलिक डेटा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला मानता है। इसीलिए चीन की मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टेट सिक्योरिटी घरेलू फ्रंट के बहाने अपने पड़ोसियों के साथ-साथ अपने दूरगामी भूरणनैतिक मित्रों को बार-बार अपने सख्त कानून का हवाला देकर चेतावनी देती आई है। इन चेतावनियों में इस बात पर ज़ोर दिया जाता रहा है कि भौगोलिक स्थानिक डेटा से ट्रांसपोर्टेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, मिलिट्री साइट्स, रिसोर्स डिस्ट्रीब्यूशन वगैरह के बारे में ज़रूरी जानकारी मिल सकती है, जिसका लीक होने पर गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में कम जानकारी होने की वजह से, कुछ लोग मैप चेक-इन के ज़रिए पैसे कमाने के मौके देख इसके लालच में आ जाते है और गलत इरादों वाली विदेशी कंपनियों के साथ मिल, गैर-कानूनी तरीके से भौगोलिक डेटा इकट्ठा करने और चुराने में मदद कर देते है।
इसीलिए चीनी कानून के तहत, सर्वे और मैपिंग के नतीजों को जिन्हें गोपनीय या सरकारी राज़ के तौर पर क्लासिफाइड किया गया है, उन्हें सख्ती से कंट्रोल किए जाने पर जोर देता है। ऐसे डेटा को देना, ट्रांसफर करना, डीक्लासिफाई करना और विदेशियों के साथ शेयर करना अप्रूवल प्रोसेस और सख्त नियमों के अधीन रखा गया है। नियमों के अनुसार तो सिर्फ़ सही क्वालिफिकेशन वाली संस्थाएँ ही ज्योग्राफिक जानकारी इकट्ठा और प्रोसेस कर सकती हैं। विदेशी या घरेलू लोगों द्वारा बिना इजाज़त मैपिंग करना गैर-कानूनी है ( देंखें संवेदनशील भौगोलिक डेटा पर कानूनी पाबंदियों का ओवरव्यू)।
चीन ज्योग्राफिक जानकारी को एक स्ट्रेटेजिक रिसोर्स मानता आया है और मैपिंग और स्पेशल डेटा तक अनधिकृत पहुंच, लीक या गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कानूनी, सुरक्षा और लागू करने के उपाय लागू करता रहा है। इसके अलावा, भौगोलिक स्थानिक जानकारी डेटा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होता है। जाहिर है ऐसे डेटा को गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा करना और सीमा पार भेजना चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों को नुकसान पहुंचाता है। मंत्रालय का मानना है अगर शामिल विदेशी कंपनियों और व्यक्तियों ने अगर चीन के अंदर सर्वे और मैपिंग के लिए ज़रूरी योग्यता हासिल नहीं की है, तो उनकी डेटा इकट्ठा करने की गतिविधियाँ जासूसी विरोधी कानून, सर्वे और मैपिंग कानून और डेटा सुरक्षा कानून के संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करने के संदेह में मानी जाती हैं।
पड़ोसी देशों के साथ कूटनीति और रणनीतिक सोच के साथ नजर
अपनी अंदरूनी सुरक्षा और ज्योग्राफिक-डेटा की गोपनीयता के अलावा, चीन अपने हितों की रक्षा करने और क्षेत्रीय माहौल को आकार देने के लिए अपने पड़ोसी देशों पर भी सक्रिय रूप से नज़र रखता आया है। इस निगरानी में डिप्लोमेसी, आर्थिक पहुंच, सुरक्षा सहयोग और रणनीतिक निगरानी शामिल है। यू ंतो चीन अपनी विदेश नीति के एजेंडे में अपने पड़ोसियों को सबसे ज्यादा अहमियत देता है और क्षेत्र को अपने विकास, सुरक्षा और प्रभाव के लिए बहुत ज़रूरी मानता रहा है। पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स में पड़ोसी देशों के साथ ’साझा भविष्य वाला समुदाय’ बनाने, और सहयोग और आपसी फायदे के ज़रिए क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और खुशहाली को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर देता आया है।
उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और सहयोग में बीजिंग नियमित रूप से पूरे एशिया में उच्च-स्तरीय दौरे, बातचीत और पार्टनरशिप करता रहता है। इसमें दक्षिण एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और उससे आगे के देशों के साथ लगातार राजकीय दौरे, डिप्लोमैटिक समिट, आर्थिक समझौते और सुरक्षा बातचीत शामिल हैं - इन सभी का मकसद आपसी विश्वास को मज़बूत करना और विकास के रास्तों को एक साथ लाना है। सुरक्षा और स्थिरता की निगरानी चीन की क्षेत्रीय भागीदारी के सुरक्षा से जुड़े पहलू भी बहुत मज़बूत हैं। यह आतंकवाद विरोधी गतिविधियों, कानून प्रवर्तन सहयोग, सीमा स्थिरता और संकट प्रबंधन के लिए पड़ोसी देशों के साथ काम करता है, खासकर शिनजियांग की मध्य और दक्षिण एशियाई देशों के साथ संवेदनशील सीमाओं पर। चीन के नेता अक्सर मिलकर जोखिमों को मैनेज करने और शांति बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर देते आए हैं। बावजूद इसके
मज़बूत मिलिट्री और समुद्री मौजूदगी ताइवान स्ट्रेट, साउथ चाइना सी, और साउथ कोरिया और जापान के साथ समुद्री सीमाओं जैसे विवादित इलाकों में ही नहीं भारत की सीमाओं के इर्द-गिर्द चीन अपने क्षेत्रीय और रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने की कोशिश के तहत मिलिट्री ताकत दिखाता ही आया है, जिसमें ड्रिल, गश्त और विदेशी जहाजों की निगरानी शामिल है। जाहिरा तौर पर उसकी इस गतिविधि पर पड़ोसी और बाहरी शक्तियां भी उस पर करीब से अपनी नज़र रखती रही हैं। देखा जाए तो समग्र सुरक्षा संबंधी विचार के तौर पर चीन तेज़ी से क्षेत्रीय गतिशीलता को ’समग्र सुरक्षा’ ढांचे के रूप में देखता है, जिसका मतलब है पड़ोसी देशों की सुरक्षा संस्कृति और उम्मीदों को समझना, और व्यापक एशियाई सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने के लिए बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन और अन्य क्षेत्रीय ढांचों जैसे सहकारी तंत्रों का समर्थन करना।
हालांकि विदेशी आलोचकों का कहना है कि ये कानून सरकार को ’महत्वपूर्ण’ माने जाने वाले सेक्टर्स से विदेशी कंपनियों को बाहर करने या देश में असहमति को दबाने के लिए व्यापक अधिकार देते हैं। आधिकारिक चाइना न्यूज़ सर्विस के अनुसार, एनपीसी स्टैंडिंग कमेटी के मुख्य प्रवक्ता ही शाओरेन का मानना है कि मैपिंग कानून में संशोधन का मकसद चीनी लोगों के बीच चीन के राष्ट्रीय क्षेत्र की शिक्षा और प्रचार के बारे में समझ बढ़ाना है। उनके अनुसार नया कानून ऑनलाइन मैपिंग सर्विस पर निगरानी बढ़ाता है ताकि यह साफ हो सके कि जो भी नेशनल मैप पब्लिश या डिस्ट्रीब्यूट करता है, उसे संबंधित नेशनल मैपिंग स्टैंडर्ड के हिसाब से ही करना होगा। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार टेक्नोलॉजी कंपनियों के बढ़ने से, जो राइड-हेलिंग और बाइक-शेयरिंग सर्विस को सपोर्ट करने के लिए अपनी खुद की मैपिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती हैं, इस वजह से इसमें बदलाव की ज़रूरत महसूस हुई। वहीं, स्टेट ब्यूरो ऑफ़ सर्वेइंग एंड मैपिंग के डिप्टी हेड सोंग चाओझी के अनुसार, जो विदेशी संगठन चीन के अंदर मैपिंग या सर्वे का काम करना चाहते हैं, उन्हें यह साफ करना होगा कि वे देश के रहस्यों को नहीं छुएंगे या देश की सुरक्षा को खतरे में नहीं डालेंगे।
निष्कर्ष
वास्तविकता तो ये है कि चीन अपने डेटा सुरक्षा पर सख्त निगरानी और कानून की आड़ में घरेलू फ्रंट के बहाने अपने सीमावर्ती सहयोगियों और शत्रुओं को चेतावनी देता रहा है। बाकी डिप्लोमैटिक बातचीत, रणनीतिक सहयोग, आर्थिक संबंधों और सुरक्षा निगरानी के ज़रिए अपने पड़ोसियों पर कड़ी नज़र तो वह रखता ही आया है, जिसका मकसद अपने हितों और प्रभाव की रक्षा करना है, साथ ही खुद को एक स्थिर क्षेत्रीय पार्टनर के तौर पर पेश करना है।
Image Credits: Global Times
Author
Rekha Pankaj
Mrs. Rekha Pankaj is a senior Hindi Journalist with over 38 years of experience. Over the course of her career, she has been the Editor-in-Chief of Newstimes and been an Editor at newspapers like Vishwa Varta, Business Link, Shree Times, Lokmat and Infinite News. Early in her career, she worked at Swatantra Bharat of the Pioneer Group and The Times of India's Sandhya Samachar. During 1992-1996, she covered seven sessions of the Lok Sabha as a Principle Correspondent. She maintains a blog, Kaalkhand, on which she publishes her independent takes on domestic and foreign politics from an Indian lens.