हाल के दिनों में चीनी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में, अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक बड़ा अंतर दिखाता है। जहां अन्य जगहों पर महंगाई के दबाव और सरकारी कर्ज को लेकर चिंताओं के कारण यील्ड में बढ़ोतरी हुई है, वहीं चीन में यील्ड नीचे आई है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि वहां की घरेलू आर्थिक स्थितियों और निवेशकों की मांग के कारण बॉन्ड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
मार्च से सरकारी कर्ज में आई वैश्विक गिरावट के बीच, जहां अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और जापान में बेंचमार्क यील्ड 35 से 60 बेसिस पॉइंट्स (BPs) तक बढ़ गई है, जबकि इसके समकक्ष चीनी सरकारी बॉन्ड (CGBs) की यील्ड में 8 बीपीएसकी कमी आई है। इस प्रदर्शन ने 'रियल मनी' निवेशकों - जैसे सॉवरेन फंड, केंद्रीय बैंक और बीमा कंपनियों - का ध्यान खींचा है। उन्हें अपने पोर्टफोलियो के ढांचे पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित होना पड़ा है। साथ ही, इसने चीनी बॉन्ड की यील्ड को स्विट्जरलैंड के बाहर सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। बीएनपी पारिबास सिक्योरिटीज में मल्टी-एसेट इन्वेस्टमेंट के प्रमुख वेई ली के अनुसार, चीनी कर्ज उन निवेशकों को आकर्षित कर रहा है जिनका मुख्य उद्देश्य 'पूंजी को सुरक्षित रखना' है। यह क्षेत्रीय पोर्टफोलियो के लिए एक ऐसा विकल्प प्रदान करता है, जिसमें जोखिम कम होता है और यह अधिक जोखिम वाले, ज्यादा रिटर्न देने वाले एसेट्स के मुकाबले एक संतुलन का काम करता है।
चीनी बॉन्ड यील्ड के साथ आखिर ये क्या हो रहा
अक्टूबर 2026 तक, चीनी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड (प्रतिफल) में गिरावट देखने को मिल रही है। इसके मुख्य कारण हैं -घरेलू मांग में कमजोरी, भारी बचत, उदार मौद्रिक नीति की उम्मीदें, और अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेशों की मजबूत मांग। हालांकि इस स्थिति के बावजूद एक महत्वपूर्ण बात यह देखने में आ रही है कि अमेरिका, यूरोप और जापान के बॉन्ड बाजारों में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) के बावजूद निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए चीनी सरकारी बॉन्ड को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं। अक्टूबर 2026 तक के उपलब्ध नवीनतम डेटा के अनुसार चीन की 10-साल की यील्ड 1.75: पर अब जापान से लगभग एक परसेंट पॉइंट कम है, जिससे 2025 के आखिर तक जो डायनामिक था, वह पलट गया है, जब जापान रेट्स मार्केट में सबसे नीचे था। हालांकि, जापान के उलट, जहां एक दशक तक बड़े सेंट्रल बैंक स्टिमुलस और उससे पहले दो दशकों के डिफ्लेशन से यील्ड में गिरावट आई थी, जिससे कैपिटल विदेश चला गया था, चीन के कड़े कैपिटल कंट्रोल पैसे को अपनी सीमाओं के अंदर ही रख रहे हैं। जापान, यूरोप और अमेरिका के उलट, चीन का सेंट्रल बैंक नरम रुख अपना रहा है, और महंगाई के दबाव पर पूरी तरह से काबू करने की कोशिश कर रहा है। पीआईएमसीओ (PIMCO) के एशिया पोर्टफोलियो मैनेजर स्टीफन चांग के अनुसार, 'मैक्रो कंडीशन और पॉलिसी रुख में यह अंतर यह समझाने में मदद करता है कि चीन का बॉन्ड मार्केट ज्यादा अस्थिर ग्लोबल रेट्स के माहौल में भी तुलनात्मक रूप से स्थिर क्यों है।'
आधिकारिक 'चाइनाबॉन्ड' के ऐतिहासिक यील्ड डेटा के अनुसार, जून 2026 के मध्य में 10-वर्षीय चीनी सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगभग 1.74: थी। इसके बाद इसमें गिरावट आई। ऐसा क्यों हुआ, यह समझने के लिए बॉन्ड की कीमत और उसकी यील्ड के बीच का अंतर जानना ज़रूरी है जो दिखाता है कि जब निवेशक पहले से मौजूद बॉन्ड खरीदते हैं, तो उनकी कीमतें बढ़ जाती हैं। अब चूंकि बॉन्ड के भविष्य के भुगतान तय होते हैं, इसलिए कीमत बढ़ने पर नए खरीदार को मिलने वाली यील्ड कम हो जाती है। इसीलिए यील्ड में गिरावट आमतौर पर बॉन्ड की भारी मांग, भविष्य में ब्याज दरें कम होने की उम्मीद, या इन दोनों बातों का संकेत होती है।
कमजोर घरेलू मांग और प्रॉपर्टी सेक्टर में मंदी मुख्य कारण
इस गिरावट के कारकों पर नजर डाले तो एक प्रमुख कारण जो नजर आता है वह यह कि चीन के परिवार और व्यवसाय उतनी तेजी से खर्च नहीं कर रहे हैं और न ही उतना कर्ज ले रहे हैं, जितना नीति-निर्माता चाहते हैं। इसके अलावा चीन को कई आपस में जुड़ी समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है जैसे प्रॉपर्टी मार्केट में लंबे समय से चल रही मंदी के कारण परिवारों के भरोसे का कमजोर हो जाना और मॉर्गेज (होम लोन) लेने के प्रति उनके उत्साह में दिलचस्पी का खतम हो जाना। डीबीएस ग्रुप रिसर्च के 15 सितंबर, 2026 के एक विश्लेषण में बताया गया है कि घरेलू स्तर पर कर्ज की मांग कमजोर है, परिवारों द्वारा लिए जाने वाले लोन में कमी आ रही है और कंपनियों की ओर से कर्ज लेने की गतिविधि भी सुस्त है। इसमें यह भी कहा गया है कि जमाकर्ता उपभोग और निवेश के लिए अपने पास नकदी (लिक्विड कैश) रखने से कतरा रहे हैं। उधर बैंकों के पास उधार देने के लिए पैसा तो है, लेकिन कर्ज चुकाने की क्षमता रखने वाले उधारकर्ताओं की ओर से मांग कम होने के कारण, उनके पास मुनाफे वाले लोन देने के मौके सीमित हो गए हैं।
महंगाई, एक बड़ा कारक है जो चीनी बॉन्ड यील्ड को प्रभावित करता है। अगर निवेशकों को लगता है कि कीमतें कम बनी रहेंगी, तो उन्हें उम्मीद होती है कि केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरें बढ़ाने का कारण कम होगा। वे यह भी उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में ब्याज दरें गिरेंगी। इससे मौजूदा सरकारी बॉन्ड आकर्षक हो जाते हैं, क्योंकि जब भविष्य में ब्याज दरें कम होने की उम्मीद होती है, तो इन बॉन्ड से मिलने वाले निश्चित भुगतान अपेक्षाकृत अधिक मूल्यवान हो जाते हैं। हालांकि चीन में कीमतों की स्थिति इतनी सरल नहीं है कि बस यह कह दिया जाए कि हर जगह कीमतें गिर रही हैं। 14 अक्टूबर, 2026 की रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन) सालाना आधार पर केवल 0.9: रही। खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर, कोर मुद्रास्फीति 1.0: पर बनी रही। उत्पादक मूल्य मुद्रास्फीति (प्रोड्यूसर-प्राइस इन्फ्लेशन) बढ़कर 5.0: हो गई, जिसका मुख्य कारण वस्तुओं और ऊर्जा की बढ़ती लागत थी। यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर देखने में ये आता है कि औद्योगिक कीमतों में तो ज़बरदस्त उछाल आया है, लेकिन उपभोक्ता मांग और उपभोक्ता कीमतों से जुड़े दबाव अभी भी काफी हद तक कम बने हुए हैं।
एक और बड़ा कारण बचत और निवेश की मांग के बीच असंतुलन है। 15 जून, 2026 को प्रकाशित रॉयटर्स के एक विश्लेषण में बताया गया है कि घरेलू बचत का एक बड़ा हिस्सा, जिसे बैंक बॉन्ड बाजार में लगा रहे थे, चीनी यील्ड को कम बनाए रखने का एक अहम कारण है। इसमें यह भी बताया गया है कि जो निवेशक अपनी पूंजी सुरक्षित रखना चाहते हैं, उनके लिए चीनी सरकारी बॉन्ड काफी आकर्षक हैं।
चीन के बॉन्ड यील्ड में गिरावट के कारण, चीनी और अमेरिकी सरकारी कर्ज के बीच ब्याज दरों में काफी अंतर आ गया है। उदाहरण के लिए, 8 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया कि चीन के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 1.7: तक पहुंच गई थी, जबकि अमेरिका के 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड लगभग 5.3: थी। इस अंतर के दो विपरीत प्रभाव हो सकते हैं। पहला, चीनी बॉन्ड की कम यील्ड उन निवेशकों के लिए इन्हें कम आकर्षक बनाती है, जिनका मुख्य ध्यान ब्याज से होने वाली आय पर होता है। दूसरा, अगर निवेशकों को उम्मीद है कि ’रेनमिनबी’ (चीनी मुद्रा) की कीमत बढ़ेगी, तो मुद्रा के मूल्य में होने वाला यह फायदा, ब्याज से मिलने वाली कम आय की भरपाई कर सकता है। इससे चीनी बॉन्ड के लिए विदेशी मांग को समर्थन मिल सकता है।
चीन में महंगाई दर इतनी कम क्यों है?
चीन में कम महंगाई दर के मुख्य कारणों में, घरेलू मांग में कमजोरी, प्रॉपर्टी मार्केट का लंबे समय से चला आ रहा संकट, औद्योगिक उत्पादन क्षमता का जरूरत से ज्यादा होना, कंपनियों के बीच कीमतों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा, और परिवारों द्वारा सोच-समझकर किया जाने वाला खर्च, शामिल है । इन वजहों से, अर्थव्यवस्था की भारी उत्पादन क्षमता के बावजूद उपभोक्ता कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। हालाँकि, एक अहम बात यह है कि कम महंगाई दर का मतलब यह नहीं है कि चीन में हर चीज की कीमत गिर रही है। कुछ चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर कुछ खास औद्योगिक क्षेत्रों में; जबकि दूसरी तरफ, जैसे कि सूअर का मांस, सब्जियां और आवास से जुड़ी चीजें, कुल मूल्य स्तर को नीचे की ओर धकेल रही हैं।
ये आंकड़े एक महत्वपूर्ण आर्थिक असंतुलन को दर्शाते हैं। उपभोक्ता कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं, जबकि फैक्ट्री-गेट कीमतों (उत्पादन स्तर की कीमतों) में भारी वृद्धि हुई है। औद्योगिक इनपुट लागत बढ़ने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतें बढ़ जाएंगी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी चीन के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों के रूप में घरेलू मांग में लगातार कमजोरी और अपस्फीति के दबाव (deflationary pressures) की पहचान की है।
चीन के लिए बॉन्ड यील्ड में गिरावट अच्छी खबर नहीं
बॉन्ड यील्ड में गिरावट सकारात्मक लग सकती है, क्योंकि इससे सरकार के लिए नया कर्ज जारी करने की लागत कम हो जाती है और आगे चलकर अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी उधार लेने की लागत घट सकती है। लेकिन इसके पीछे के असली कारण मायने रखते हैं। मुख्य सवाल यह है कि क्या निवेशक बॉन्ड इसलिए खरीद रहे हैं क्योंकि आर्थिक संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, या इसलिए कि उन्हें निवेश के लिए कोई अन्य आकर्षक विकल्प नहीं दिख रहा है? अगर यील्ड में गिरावट मुख्य रूप से आर्थिक विकास, लोगों के भरोसे और निजी निवेश में कमजोरी के कारण आ रही है, तो यह रुझान मजबूती के बजाय आर्थिक कमजोरी का संकेत हो सकता है। बॉन्ड मार्केट में अत्यधिक तेजी का जोखिम से चीनी अधिकारी भी वाकिफ हैं। जनवरी 2025 में, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के एक अधिकारी ने चेतावनी दी कि बॉन्ड यील्ड का आर्थिक बुनियादी बातों (economic fundamentals) से कोई लेना-देना नहीं रह सकता है। साथ ही, अगर बाजार का रुख पलटता है, तो कर्ज लेकर निवेश करने वाली संस्थाओं (leveraged institutions) को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बॉन्ड यील्ड में तेजी से आती गिरावट को देखते हुए, केंद्रीय बैंक ने ट्रेजरी बॉन्ड की अपनी खरीद को भी रोक दिया था।
हाल ही में, 14 सितंबर 2026 को रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी कि चीन सरकार पीबीएसओ बैंकों के पास मौजूद लंबी अवधि के बॉन्ड और ब्याज दर के जोखिमों पर नज़र रखने के लिए कुछ और कदम उठाने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय 10-वर्षीय चीनी सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगभग 1.68: थी। खतरा बिल्कुल साफ है-अगर बॉन्ड की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो यील्ड में मामूली सी बढ़ोतरी भी उन निवेशकों को नुकसान पहुंचा सकती है जिनके पास लंबी अवधि के बॉन्ड हैं, खासकर उन निवेशकों को जो लीवरेज (उधार लेकर निवेश) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस तरह के ट्रेंड के तीन मुख्य परिणाम सामने आते हैं। पहला, चीन की आर्थिक रिकवरी असमान बनी हुई है। 9 अक्टूबर 2026 को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन कमजोरियों की वजह से चीन के विकास लक्ष्य पर दबाव पड़ रहा है, जिसके चलते अतिरिक्त वित्तीय सहायता की जरूरत महसूस हो रही है। दूसरा, चीन की मौद्रिक नीति अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से अलग दिशा में जा रही है। जहां अन्य जगहों पर महंगाई का दबाव अधिक है, वहां सरकारों और निवेशकों को बढ़ती यील्ड (रिटर्न) का सामना करना पड़ सकता है। तीसरा, रेनमिनबी (चीनी मुद्रा) और अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। अमेरिका के साथ यील्ड में बड़ा अंतर होने से कुछ विदेशी निवेशक हतोत्साहित हो सकते हैं; वहीं, मुद्रा के मूल्य में वृद्धि की उम्मीदें और चीनी बॉन्ड में निवेश से मिलने वाले विविधीकरण के फायदे अन्य निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
चीनी बॉन्ड यील्ड में गिरावट को कई कारकों के संयुक्त प्रभाव के रूप में समझा जा सकता है- घरेलू स्तर पर क्रेडिट की कमजोर मांग, जरूरत से ज्यादा बचत, कम बनी हुई महंगाई, सहायक मौद्रिक नीति की उम्मीदें, और पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए चीनी बॉन्ड की बढ़ती मांग। अक्टूबर 2026 में, रेनमिनबी (चीनी मुद्रा) की कीमत में बढ़ोतरी ने इसे एक अतिरिक्त सहारा दिया है। इसलिए, यह रुझान वित्तीय बाज़ार के विकास और आर्थिक संकेत, दोनों ही है। यह चीनी सरकारी ऋण की मज़बूत मांग को दर्शाता है, लेकिन साथ ही बीजिंग के सामने मौजूद चुनौती को भी उजागर करता है- प्रचुर तरलता (liquidity) और कम उधार लागत को घरेलू खपत, निजी निवेश और टिकाऊ आर्थिक विकास में कैसे बदला जाए।
Image Credit: Global Times
Author
Rekha Pankaj
Mrs. Rekha Pankaj is a senior Hindi Journalist with over 38 years of experience. Over the course of her career, she has been the Editor-in-Chief of Newstimes and been an Editor at newspapers like Vishwa Varta, Business Link, Shree Times, Lokmat and Infinite News. Early in her career, she worked at Swatantra Bharat of the Pioneer Group and The Times of India's Sandhya Samachar. During 1992-1996, she covered seven sessions of the Lok Sabha as a Principle Correspondent. She maintains a blog, Kaalkhand, on which she publishes her independent takes on domestic and foreign politics from an Indian lens.