चीन कभी दुनिया के वाइन व्यापार के लिए विकास का सबसे स्थिर और बढ़ता हुआ स्रोत हुआ करता था, अब वह वैसा नहीं रहा और इसके परिणाम अब साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं।
चीन की पारंपरिक स्पिरिट्स और प्रीमियम वाइन की खपत में गिरावट बता रही है कि चीन में पेय पदार्थों के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। माओताई शहर जहाँ कभी बेहद पसंद की जाने वाली ’बाईजियू’ शराब बनती थी वहां अब ये अपनी चमक लगातार खो रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस शहर में कभी 1,000 से भी ज्यादा छोटी डिस्टिलरी हुआ करती थीं, जिनमें से पिछले कुछ सालों में सैकड़ों को बंद करने पर मजबूर होना पड़ा है; अब उनमें से बहुत कम ही चालू बची हैं। दूसरे कस्बों की तुलना में ’बाईजियू’ उत्पादन के लिए मशहूर, माओताई पर बीजिंग की बढ़ती सख्ती का असर ज्यादा दिखाई देता है। दशकों तक, सरकारी कंपनी ’क्वीचाऊ माओताई’ की तरक्की सरकारी खरीद पर निर्भर थी, जिसमें कीमतों की ज्यादा परवाह नहीं की जाती थी। इस कंपनी की सफलता से प्रेरित होकर कई अन्य छोटे शराब बनाने वाले और व्यापारी भी सामने आए। वक्त ऐसा भी था कि प्रीमियम बाईजियू (सफेद शराब) उत्सवों, कूटनीति और विशिष्ट लोगों की सभाओं के बीच अक्सर बड़े भोजों और समारोहों में ’टोस्ट’ (शुभकामनाओं) के लिए इसका उपयोग किया जाता रहा है। हालात ये थे कि यहां एक बोतलबंद पानी खरीदने से कहीं ज्यादा आसान बाईजियू खरीदना था।
हालांकि चीन में इम्पोर्टेड वाइन की मांग गत कुछ समय से कम होती जा रही है, और इसके साथ ही, दुनिया के वाइन व्यापार की एक अहम नींव भी कमज़ोर पड़ रही है। यह गिरावट पिछले कई सालों से जारी है। पहले महामारी की वजह से रुकावटें आईं, फिर प्रॉपर्टी मार्केट में गिरावट के कारण ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता सीमित हो गई। लेकिन मई 2025 के एक निर्देश ने, जिसके तहत सरकारी और कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यक्रमों में शराब पर रोक लगा दी गई है, मांग के एक अहम स्रोत को और भी कम कर दिया है। इन सभी कारणों ने मिलकर वाइन की मांग को उस स्तर से बहुत नीचे गिरा दिया है, जिस पर वह कभी हुआ करता था। इसके चलते वाइन का बड़ा स्टॉक बिना बिके पड़ा है, और ऑस्ट्रेलिया से लेकर फ्रांस तक के उत्पादकों को अपना उत्पादन कम करने पर मजबूर होना पड़ा है। जो चीन कभी दुनिया के वाइन व्यापार के लिए विकास का सबसे स्थिर और बढ़ता हुआ स्रोत हुआ करता था, अब वह वैसा नहीं रहा, और इसके परिणाम अब साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं। फिर युवाओं में शराब में घटती दिलचस्पी की वजह से भी कई लोगों को इस बात पर शक है कि पहले जैसा ज़बरदस्त क्रेज़ कभी वापस आएगा। लेकिन इन सब बातों से इतर, इंडस्ट्री के कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि ’बाईजियू’ एक चक्रीय सेक्टर है, जिसमें लगभग पाँच साल के उतार-चढ़ाव आते रहते हैं;
बदल रहे माओताई का ऐतिहासिक महत्व रहा है
दक्षिण-पश्चिमी चीन के गुइझोऊ प्रांत में, चिशुई नदी के किनारे स्थित माओताई शहर ऐतिहासिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह जिन बिंदुओं का प्रतिनिधित्व करता है उनमें प्राचीन चीनी शराब बनाने की परंपराएँ तो सर्वोपरी है पर आधुनिक औद्योगिक और आर्थिक विकास और राजनीतिक प्रतीकवाद और कूटनीति के अलावा सांस्कृतिक पहचान और प्रतिष्ठा के लिए भी इसके महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता। ’बाईजियू’ का सबसे प्रतिष्ठित ब्रांड, ’क्वीचाउ माओताई’, चीनी संभ्रांत लोगों और व्यापारियों के बीच सामाजिक मेलजोल और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। माओताई ब्रांड को 1972 के बाद अंतरराष्ट्रीय ख्याति तब मिली, जब माओ ज़ेडोंग ने चीन की यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज में इसे परोसा गया। तब से, माओताई को अक्सर कूटनीतिक कार्यक्रमों में परोसा जाता रहा, जिससे इसे राष्ट्रीय शराब का दर्जा हासिल करने में मदद मिली। फिर पनामा-पैसिफिक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में पुरस्कार जीतने के बाद तो माओताई को विश्वव्यापी प्रसिद्धि मिली, जिससे इसकी प्रतिष्ठा में काफी वृद्धि हुई। माओताई शहर न केवल एक स्थान के रूप में प्रसिद्ध रहा है, बल्कि एक ऐसे उत्पाद के उद्गम स्थल के रूप में भी जाना जाता है जो चीन के राष्ट्रीय प्रतीक के तौर पर काम करता है, ठीक वैसे ही जैसे स्कॉटलैंड में स्कॉच व्हिस्की या फ्रांस में रेड वाइन।
भौगोलिक कारणों से भी यह उत्पाद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है क्योंकि यहाँ की अनोखी सूक्ष्म जलवायु, चिशुई नदी का पानी, खमीरीकरण [फ़र्मेंटेशन], की पारंपरिक विधियाँ इसे शैम्पेन जैसे ’संरक्षित-मूल’ उत्पादों जैसा ही दर्जा प्रदान करता है। माओताई क्षेत्र में शराब बनाने की एक लंबी परंपरा रही है, जो 2,000 साल से भी ज्यादा पुरानी है; यहाँ तक कि हान राजवंश के समय से ही शराब के शुरुआती रूपों का ज़िक्र मिलता है। समय के साथ, खासकर तांग और सोंग राजवंशों के दौरान, चीनी आसवन (distillation) तकनीकों में विकास हुआ, जिसने माओताई की विशिष्ट शैली की नींव रखी। माओताई शराब का आधुनिक रूप चिंग राजवंश (1644 के बाद) के दौरान सामने आया, जब इस शहर में अलग-अलग क्षेत्रीय आसवन तकनीकों को आपस में मिलाया गया। 18वीं सदी की शुरुआत तक, माओताई को स्थानीय स्तर पर शराब उत्पादन के एक प्रमुख क्षेत्र के तौर पर पहले ही पहचान मिल चुकी थी।
यही नहीं, एक वक्त ऐसा भी था जब माओताई कस्बा ’रेड-टूरिज़्म’ का एक प्रमुख केंद्र था। ‘जर्नल ऑफ़ टूरिज़्म एंड कल्चरल चेंज’ में प्रकाशित एक पेपर में ’रेड-टूरिज़्म को देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और युवा पीढ़ी के बीच कम्युनिस्ट विचारधारा के लिए नया समर्थन विकसित करने के रूप में परिभाषित किया गया है और ’लॉन्ग मार्च’ से इसका गहरा जुड़ाव देखने को मिलता है। कुओमिन्तांग, या राष्ट्रवादियों के साथ 1927 में गठबंधन टूटने के बाद कम्युनिस्ट भागकर जियांग्शी प्रांत के पश्चिमी हिस्से में चले गए। जहां उन्होंने ’सोवियत रिपब्लिक ऑफ़ चाइना’ की स्थापना की। लेकिन तीन साल बाद, च्यांग काई-शेक के नेतृत्व वाली कुओमिन्तांग सेनाओं से घिर जाने पर कम्युनिस्ट नेताओं ने अक्टूबर 1934 में ’रेड आर्मी’ को लामबंद करके वहाँ से निकल भागने का फ़ैसला किया। पूरे एक साल तक चली इस यात्रा ने कम्युनिस्ट पार्टी की किस्मत ही बदल दी। यह 1934 से 1936 के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी की ’रेड आर्मी’ द्वारा कुओमिन्तांग (या राष्ट्रवादी) सेनाओं के सामने की गई एक बड़े पैमाने की सैन्य वापसी थी। इस संबंध में माओताई प्रसंग पर जनरल गेंग बियाओ (1909-2000) ने अपने संस्मरण में एक स्थान पर लिखा है कि कुछ सैनिकों ने खुद को तरोताज़ा करने के लिए माओताई में बनी ’बाईजियू,’ खरीदी, जबकि कुछ ने अपनी मांसपेशियों को आराम देने और रक्त संचार को बेहतर बनाने के लिए इसे अपने पैरों पर मला।
पारंपरिक मांग में आ रही कमी से ‘बाईजियू’ सेक्टर संकट में
माओताई क्षेत्र की मुश्किलें कमज़ोर घरेलू खपत की वजह बीजिंग के हालिया खर्च में कटौती के उपायों के तहत, सरकारी दावतों में शराब पर आंशिक प्रतिबंध लगाने को ही नहीं मानती, कुछ और गहरे बदलाव उसे हैरत में डाल रहे। खासतौर से युवाओं का ज़बरदस्ती शराब पीने के रिवाजों को नकारना। यह ’बाईजियू’ की पारंपरिक मांग को बढ़ाने वाले कारकों के लिए एक दोहरा झटका है। इसके अलावा कई उपभोक्ता महँगी प्रीमियम ’बाईजियू’(जैसे माओताई) से हटकर सस्ती, मध्यम-श्रेणी की विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
आज, शराब बनाने वाली कंपनियों के लिए, अपनी ब्रांडिंग को नए सिरे से गढ़ना और नए बाज़ार तलाशना अब अस्तित्व का सवाल बन गया है। माओताई शहर में रहने वाले कई लोगों के मन में, सिर्फ़ चार साल पहले के तेज़ी से बढ़ते बाज़ार की यादें ताज़ा रह गई हैं। उस समय ’क्वीचाऊ माओताई’ की थोक कीमत, आज की कीमत से दोगुनी से भी ज्यादा थी। यह सिर्फ़ एक शराब से कहीं बढ़कर थी, इसे ’तरल सोना’ ¼liquid gold½ माना जाता था। तोहफ़े देने में एक रुतबे का प्रतीक, तिजोरी में संभालकर रखने लायक एक कीमती चीज़, या फिर एक ऐसा भरोसेमंद निवेश, जिसकी कीमत भविष्य में और बढ़ने की संभावना रहती थी या है। लेकिन 2025 में, विश्लेषकों का अनुमान के अनुसार पूरे बाईजियू सेक्टर की बिक्री में लगभग 15: की गिरावट आई, और ’क्वीचाऊ माओताई’ जैसे अन्य कई बड़े निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
तीन साल पहले, लुओ के परिवार को डिस्ट्रीब्यूशन (वितरण) के बारे में कभी चिंता करने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। व्यापारी और कंपनियाँ तैयार माल सीधे खरीद लेती थीं, और डिस्टिलरी को अक्सर पैकेजिंग के सामान के लिए लाइन में लगना पड़ता था। इस साल, चुंग युंग त्यौहार से एक दिन पहले, लुओ ने शहर के चौक के पास सरकार द्वारा आयोजित एक ’बाईजियू’ मेले में एक छोटा सा स्टॉल लगाया, ताकि वहाँ से गुज़रने वाले टूरिस्टों को अपनी ओर खींचा जा सके। पहले, जहां मुख्य फ़ोकस बिज़नेस-टू-बिज़नेस पर था, अब, वह आम लोगों तक पहुँचने के लिए भी एक ज़रिया बनाने पर भी ध्यान देने पर भी है। दूसरे घरेलू सेक्टरों की तरह, जो घरेलू माँग में सुस्ती का सामना कर रहे हैं, ’बाईजियू’ बनाने वाली कंपनियाँ भी अब विदेशी बाज़ारों पर नज़र गड़ाए हुए हैं। शराब की दूसरी किस्मों के उलट, चीनी ’बाईजियू’ पूरी तरह से घरेलू बाज़ार पर ही निर्भर है। लेकिन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि ’जेन जेड’ के लोगों में हल्की शराब पीने का जो ग्लोबल ट्रेंड चल रहा है, उसकी वजह से चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। कियानताई डिस्टिलरी में, मैनेजर शियाओ शुआई का कहना है कि उन्हें नहीं लगता युवा लोग ’बाईजियू’ से सिर्फ़ इसलिए दूर रहते हैं क्योंकि उन्हें तेज़ शराब पसंद नहीं है। उनके अनुसार, बहुत से लोग अब भी बार जाकर रम, कॉकटेल, व्हिस्की या हेन शी पीना पसंद करते हैं, जबकि असल में वे काफ़ी तेज़ होती हैं। बात बस इतनी है कि वे ऐसी अधिकार-जताने वाली या अधिक दबाव वाली स्थितियों में रहना पसंद नहीं करते, जहाँ उन्हें ज़बरदस्ती बहुत ज्यादा शराब पीनी पड़े।
कमज़ोर घरेलू खपत को सुधारने के प्रयास
हाल के दिनों में ’क्वीचाऊ माओताई’ ने खुद को शान-शौकत और भ्रष्टाचार की छवि से दूर करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। युवा ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए नए प्रोडक्ट लॉन्च करना आरंभ किया हैं, जैसे- ’बाईजियू’-फ़्लेवर वाली आइसक्रीम, और चीन की सबसे बड़ी कॉफ़ी चेन, लकइन कॉफ़ी के साथ मिलकर बनाई गई अल्कोहल-युक्त लैट्टे। यह बदलाव उनके लिए तब और भी ज़रूरी हो गया है जबकि चीन की आबादी तेज़ी से बूढ़ी हो रही है। झोंगताई इंटरनेशनल के मुख्य अर्थशास्त्री, ली शुनलेई ने उसी कार्यक्रम में बताया कि ’बाईजियू’ पीने वाले मुख्य ग्राहकों का समूह, जिसमें आम तौर पर 30 से 55 साल की उम्र के लोग शामिल होते हैं, पिछले पाँच सालों में लगभग 2 करोड़ 80 लाख (28 मिलियन) कम हो गये है। स्थानीय ’बाईजियू’ बनाने वाले सोशल मीडिया पर लोगों की सोच बदलने की कोशिश कर रहे हैं। मैनेजर शियाओ शुआई ’दो-यिन’ ( टिक्टॉक का चीनी वर्जन) पर वीडियो पोस्ट करते हैं। इन वीडियो में डिस्टिलरी के रोज़ के काम-काज-भाप देने से लेकर फ़र्मेंटेशन तक-दिखाए जाते हैं, और साथ ही वे चीन के पीने के कल्चर पर अपनी राय भी देते हैं।
‘बाईजियू’ इंडस्ट्री की कमज़ोर हालत को सुधारने की कोशिश में, गुइझोउ ने एक तीन-साल का प्लान जारी किया है। जिसका मकसद इस सेक्टर को सिर्फ़ ’शराब बेचने’ से बदलकर, ’बाईजियू’ पर आधारित एक व्यापक ’लाइफ़स्टाइल’ को बढ़ावा देने वाला स्थान बनाना है। इस रणनीति में ’बाईजियू’ को टूरिज़्म, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और वेलनेस सेवाओं के साथ जोड़ना, और कम अल्कोहल वाले, फलों के स्वाद वाले ’बाईजियू’ और चीनी-स्टाइल के कॉकटेल बनाना आदि शामिल है। लेकिन इंडस्ट्री के बड़े दिग्गजों की तुलना में, छोटे निर्माताओं को-जिनके ब्रांड ज्यादा मशहूर नहीं हैं- नए प्रोडक्ट लॉन्च करने में अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जैसा कि चांगहोंग के लुओ कहते है कि वह सिर्फ़ बिक्री के चैनल बढ़ाने पर ही ध्यान दे सकते हैं। विदेशों में अपनी पैठ बनाने की इस कोशिश में भी ’क्वीचाऊ माओताई’ सदैव आगे रहा है। जून 2025 में पेरिस में हुई वीवा टेक्लॉलाजी कॉन्फ्रेंस में भी शामिल हुआ। कंपनी के डायरेक्टर वांग ली के अनुसार कंपनी ने उन इलाकों में अपने मार्केटिंग के प्रयासों को और तेज़ कर दिया है, जहाँ दूसरी चीनी कंपनियाँ भी अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं। उनके अनुसार, खपत के तरीकों में बदलाव, बदलती आदतें और बेमेल बिज़नेस मॉडल का मतलब है कि यह इंडस्ट्री एक अहम बदलाव के दौर से गुज़र रही है। वांग मानते है कि कई मुश्किलों और चुनौतियों के बावजूद, यह इंडस्ट्री के लिए खुद को फिर से शुरू करने, नए सिरे से गढ़ने और बाज़ार के हिसाब से बेहतर ढंग से ढलने, मांग पूरी करने और विकास को बढ़ावा देने का एक कीमती मौका भी है।
निष्कर्ष
निश्चित तौर पर शराब की खपत में कमी ( खासतौर से प्रीमियम और सरकारी इस्तेमाल के लिए शराब पीना) माओताई पर असर डालने वाला एक मुख्य कारण है। लेकिन यह भी कहना अतिश्योक्ति होगी कि यह उद्योग खत्म हो रहा है, बल्कि खपत के एक नए मॉडल की ओर बढ़ रहा है, यह कहना उचित है। माओताई का मामला चीन में हो रहे एक बड़े बदलाव को दिखाता है। सरकार द्वारा संचालित, संभ्रांत वर्ग की खपत वाली व्यवस्था से यह बाज़ार द्वारा संचालित, उपभोक्ता-केंद्रित शराब संस्कृति की ओर अपने पैर फैला रहा। माओताई सफल होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कितनी अच्छी तरह अपनी प्रीमियम पहचान को नए सिरे से परिभाषित करता है, परंपरा और नएपन के बीच संतुलन बनाते हुए।
Image Credits: Xinhua
Author
Rekha Pankaj
Mrs. Rekha Pankaj is a senior Hindi Journalist with over 38 years of experience. Over the course of her career, she has been the Editor-in-Chief of Newstimes and been an Editor at newspapers like Vishwa Varta, Business Link, Shree Times, Lokmat and Infinite News. Early in her career, she worked at Swatantra Bharat of the Pioneer Group and The Times of India's Sandhya Samachar. During 1992-1996, she covered seven sessions of the Lok Sabha as a Principle Correspondent. She maintains a blog, Kaalkhand, on which she publishes her independent takes on domestic and foreign politics from an Indian lens.